दीपावली 2019

0
11

दीपावली,लक्ष्मी पूजन , शारदा पूजन के शुभ मुहूर्त

आसोवदी-३० अमावस्या, रविवार, दिनांक २७-१०-२०१९ के स्टा.टा. १२:२५ से दीपावली का प्रारंभ होता है. इस तरह प्रदोष व्यापीनी अमावस्या होने से आज लक्ष्मीपूजन करना शास्त्र शुद्ध है. नक्षत्र – चित्रा/ स्वाति है.

समय : सुबह ०८:१५ से १२:३१,(चल,लाभ, अमृत) दोपहर ०१:५६ से ०३:२१ तक (शुभ) शाम:०६:१२ से १०:५६ (शुभ,अमृत,लाभ) रात्रि : ०२:०६ से ०३:४१ (लाभ) ०५:१५ से ०६:५० (शुभ)  

होरा के अनुसार  आसोवदी – १४,रविवार, दिनांक २७-१०-२०१९ नक्षत्र चित्रा / स्वाति

सुबह : ०८:१५ से १२:३१ तक (शुक्र,बुध,चंद्र) की होरा

दोपहर : ०१:३९ से ०३:३० (शुक्र की होरा)

शाम : ०६:०४ से रात्री १०:४९ (गुरु-शुक्र की होरा)

रात्रे ०१:४० से सुबह ०३:५० (गुरु की होरा) (दिनांक २८ की सुबह )

दीपावली का त्यौहार पूरे भारत में मनाया जाता हैं.

दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों ‘दीप’ अर्थात ‘दीया’ ‘आवली’ अर्थात ‘श्रुंखला’ दीवाली के दिन जो दीप प्रकट करके हम घर के बहार रखते है इसे दिवाली कहते है. अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है.

अलग-अलग भाषा में दीपावली के अलग-अलग नाम हैं.

जैसे पंजाबी में ‘दियारी’, बंगाल में ‘दीपावली’, उड़ीया में ‘दीपाबोली’, मारवाड़ी में ‘दियाली’ यह दिन वर्ष का अंतिम दिन होता हैं.

नए वर्ष की शुरुआत दीपावली के दुसरे दिन होती है.

अपने-अपने रीत रिवाजो के अनुसार सभी राज्यों के लोग पूजन अर्जन करते हैं.

२४ में तीर्थकर महावीर स्वामी को इस दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी.

दीवाली का त्यौहार भारत में एक खरीदी करने का त्यौहार भी हैं.

सभी लोग खरीदी भी करते हैं. दीवाली में जर-जवेरात, सोने-चांदी के घरेणे इसकी भी खरीददारी की सबसे बड़ी सीजन हैं.

मिठाई बनाने वाले हलवाई लोग भी बहुत मिठाई बेचकर पैसे कमाते है.

आतीसबाजी की खरीददारी प्रत्येक वर्ष पाचसे सात हजार करोड़ होती है. पटाखों के व्यापारीओं को यह माल का  खपत वेचाण हो जाता हैं.

दीपावली के पहले लोग क्या-क्या करते हैं.

दीपावली की तैयारी कई दिनों से शुरुआत हो जाती हैं. पहले तो घर की सफाई होती हैं. साल भर क़ा कूड़ा (कचरा) घर से बहार किया जाता है.

लक्ष्मीजी को साफ़ सुथरी जगह ज़्यादा पसंद हैं इसीलिए घर में विशेष सफाई सब करते हैं. स्वच्छ घर होने से वर्ष भर लक्ष्मीजी कृपा आपके घर में रहती हैं.

घरो का रंग-रोगान किया जाता हैं, और अलग-अलग प्रकार की सजावट घर में की जाती है और जाहेर क्षेत्रो में दुकानों में, होटलों में भी अनेक तरह से सजाया जाता है. 

दिवाली में मिठाईओ और पकवान का बड़ा महत्त्व है. नमकीन और अलग-अलग प्रकार के सब नास्ते बनाए जाते है. गुजरात में पापड़, मठिया, चोराफडी भी बनाये जाते है. नए वस्त्रो का भी बहुत महत्त्व है,

कई लोग उपहार भी देते है वह उपहार की खरीदी भी पहले की जाती है, उपहार इसीलिए दिए जाते है कि रिश्तों की डोर मजबूत हो. यह दिवाली के दिन घर के आँगन में रंगोली की जाती है. संध्याकाल के समय पर दिये भी जलाये जाते है. आप सभी को हमारी तरफ से दिवाली की खूब-खूब शुभकामनाएं. जय अम्बे   

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें