कालीचौदस कथा | नरक चतुर्दशी कथा

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काली चौदस

कालीचौदस | नरक चतुर्दशी महत्त्व

कालीचौदस कथा | नरक चतुर्दशी कथा

कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को गुजरात मे कालीचौदस के नाम से  जाना जाता हैं.

दीवाली के एक दिन आगे कालीचौदस होती हैं.

नर्कासुर पर भगवान विष्णु ने विजय प्राप्त किया था.

यह दिन को देवगण-मनुष्यगण विजय प्राप्ति का दिन मनाते है और यह दिन को कालीचौदस कहते है.नर्कासुर नामका काल था उस काल को चौदस के दिन मिटाया और यह रात काली रात होती है इसीलिए यह पर्व मनाया जाता है.  कालीचौदस को काली देवी की पूजा का गहरा सबंध रहा हैं. तांत्रिक विधीओ में तंत्र करनेवाले लोग इस दिन का महत्त्व बहुत मानते हैं.

तंत्र शास्त्र में देखा जाये तो दश महा विद्याओ की सर्वोपरी देवी भगवती कालिका है.

काली शब्द हिन्दी के काल शब्द से उत्पन्न हुआ हैं.

तंत्र के साधक महाकाली देवी की साधना करते हैं और साधक बनकर साधते है और यह सब विधिविधान करने से साधक के शरीर में ऊर्जा शक्ति प्राप्त होती है यह ऊर्जा देवी माँ से आशीर्वाद के रूप में प्राप्त होती है. कालीदेवी की  साधना सर्वोपरी है. यह देवी से अष्ट सिद्धी प्राप्त होती है. कालीदेवी का पूजन विशेष माना गया हैं. अगर किसीको लंबे समय से बीमारी है तो इस काली चौदस में पूजा करने से बीमारी दूर हो जाएगी जादू टोना किया हो काला जादू किया हो तो इस दिन पूजा करनी चाहिए बुरे प्रभाव बूरी आत्माओ से सुरक्षा मिलती हैं. कर्ज में राहत मिलती है व्यापर में छोटी मोटी परेशानिया दूर हो जाती है तनाव मानसिक चिंता विगेरे भी पूजा करने से दूर होती है दाम्पत्य जीवन में भी अगर तनाव है तो काली चौदस के दिन पूजा करने से या करवाने से आपको फायदा मिलेगा अगर आपके व्यवसाय में निरंतर पूर्णता नहीं देखी जाती है तो एक पिला कपड़ा लीजिए इसमें एक टुकड़ा काली हल्दी क़ा राखीए ग्यारा गोमती चक्र रखीए रूपये का सिक्का ११ रखीए धन दायक कोडिया बांधकर इसके उपर १०८ बार श्री लक्ष्मी नारायणाभ्याँ नमः इस मंत्र का जाप करे और अपना व्यवसाय का स्थान हैं वहा रखे

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