Vagh baras Muhurat Significance and pooja time

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वाघ बारस 2019 जानीये मुहूर्त और महत्त्व

वाघ बारस का मुहूर्त,महत्त्व और रहस्य 2019

वाघबारस (गोवत्सद्वादशी) के शुभ मुहूर्त :-

दि.२५ / १० / २०१९ शुक्रवार के दिन गोवत्स द्वादशी है. 

(Govatsadwadashi vaghbaras- 25th October 2019 Friday)

प्रदोषकाल गोवत्सद्वादशी मुहूर्त

०६: ०५ P.M. से ०८: ३६ P.M. तक समय अवधि २ घंटे और ३१ मिनट है.

(Govatsa Dwadashi puja time)

(Pradoshkala govatsadwadashi muhurat- 06:05P.M. To 08:36P.M.

Duration 02 hours 31 minutes)

वाघ बारस का महत्त्व और रहस्य:-

भारतीय हिंदू संस्कृति का दिवाली त्यौहार आने से पहले द्वादशी आती है. कई राज्यों में इसे बछबारस कहते हैं.

और कई राज्यों में वत्सद्वादशी कहते हैं और पुरे भारत में यह दीवाली का पर्व मनाया जाता है. गुजरात में बाघबारस कहते हैं.

हरेक पर्व के पीछे एक गुढरहस्य छिपा होता है. द्वादशी का व्रत-पर्व शुभ फलदाई है.

भारतीय संस्कृति में बछबारस प्रतिवर्ष जन्माष्टमी के ४ दिन के बाद द्वादशी को मनाया जाता है.

इस द्वादशी के दिन गाय और बछड़े की पूजा होती है. बछड़ा गाय के छोटे बच्चे को कहते हैं और गोवत्स का मतलब भी गाय का बच्चा होता है. यह पर्व की महिमा राजस्थानी महिलाओं में ज़्यादा लोकप्रिय है.

इस महत्त्व का त्यौहार को देखते हुए जन्माष्टमी के ४ दिन के बाद जो बारस आती है इसे बछबारस कहते हैं. बछ बारस का महत्त्व ऐसा है कि भगवान कृष्ण को गाय और बछड़ा बहुत प्रिय था. गाय में ३३ करोड़ देवता का वास है. इस पूजा से गाय के अंदर बेठे हुए देवताओ का और गाय माता का आशीर्वाद मिलता है.

इस पर्व के ऊपर मोठ-बाजरे में घी और चीनी मिलाके पिंडिया बना लेते है.(लड्डू जैसा) चने की दाल का लड्डू, कच्चा दूध, महेदी, मौली, चावल, गुड, सुपारी, पैसे, ब्लाउज पीस, फूलमाला लेकर गाय की पूजा करनी चाहिए.

अब हम दिवाली के दिन गोवत्स के बारे में यानी वाघबारस के बारे में बताते हैं. आसो मास कृष्ण पक्ष की वाघबारस  (द्वादशी) गुजरात में होती है.

और अन्य राज्य में कार्तिक कृष्ण पक्ष में गोवत्सद्वादशी होती है. इस पर्व के दिन  गायमाता और बछड़े की पूजा की जाती है.

पूजा का समय गोधूलि बेला में की जाती है.यानी सब गाय चारा चरकर जब वापस आती है तब यह पूजा की जाती है. गोधूलि बेला में यानी सुबह में भी सूर्य देव पूरी तरह ना निकले तब और संध्या काल के समय आपकी अनुकूलता के अनुसार पूजन करे.

इस दिन व्रत की भी महिमा है अगर आप रखना चाहते हो तो

सुपुत्र की प्राप्ति हेतु सौभाग्यवती स्त्री यह व्रत रख सकती है. सौभाग्यवती स्त्रीओ को यह व्रत करना बताया है.  अगर आप पुत्र प्राप्ति की इच्छा से यह व्रत करना चाहते हो तो श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करे.यह व्रत-  पर्व मंगल कामना के लिए और पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है.

अगर आप व्रत नही कर सकते हो तो गौ माता के दर्शन मात्र से व्रत का फल प्राप्त होता है और आपको पुण्य की प्राप्ति होती है.

जो पुण्य गायमाता के दर्शन मात्र से मिलता है. वह पुण्य कही से भी नहीं मिलता है. ऐसा शास्त्रकारो का मानना है. एक बात में आपको संक्षिप्त मैं बता रहा हूँ.

भविष्यपुराण के अनुसार गौ माता के पृष्टदेश में ब्रह्म का वास है. गले में विष्णु का वास है. मध्य में समस्त देवताओं और रोम कूरपों में महर्षिगण. पूछ में अनंतनाग. खूरो में समस्त पर्वत. गोमूत्र में गंगा दी नदिया. गो मय में (छाण) लक्ष्मी का वास है और नेत्रों में चंद्र सूर्य है.

वाघबारस(द्वादशी) के दिन गाय के दूध का खाने-पीने में उपयोग नहीं करना चाहिए.

घर के आंगन में रंगोली बनानी चाहिए. वाघबारस की पूजा में धान्य और चावल का उपयोग नही करना है.

उपवास के खाने में चने की दाल से बनाया हुआ ही उपवास में लेना है. व्रत करनेवाली सौभाग्यवती स्त्रीओं को मध्यान समय के बाद बछड़े को सजाने का विधान भी मिलता है.

पुराण के माध्यम से आपको यह बता रहा हु.

संध्याकाल के समय घर में और घर के बाहर दीपक प्रजवलित करे.

पुरे भारत में पटाखे फोड़कर वाघबारस का पर्व आनंद-उत्सव से सभी मनाते हैं.

इस द्वादशी का मूल संकेत संतान की खुशहाली है बच्चे पटाखों से खूब आनंदित होते है बच्चो को एक उर्जा मिलती है बच्चो की ख़ुशी ही सब की ख़ुशी है बच्चे भगवान के स्वरूप होते है.                       

       हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया है. अतः गौ संरक्षण का भी यह पर्व वाघबारस संदेश देता है. गाय की रक्षा करे.

आप सभी को वाघबारस की शुभ कामनाए ||जय अम्बे ||

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